Greater Noida Accident: Yuvraj Mehta Death पर BJP MP का बयान

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

ग्रेटर नोएडा में टेक कर्मचारी युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद जनाक्रोश चरम पर है। यह हादसा अब सिर्फ एक road accident नहीं, बल्कि administrative negligence और system failure का प्रतीक बन चुका है।

इस बीच मामले पर बीजेपी सांसद महेश शर्मा का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने घटना को “दुखद और चिंता जनक” बताया है।

BJP MP Mahesh Sharma का बयान: ‘लापरवाही हुई है’

महेश शर्मा ने कहा, “यह बेहद दुखद घटना है। कहीं न कहीं चूक और लापरवाही हुई है। मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लिया है। दोषियों की पहचान कर सख्त सजा दी जाएगी।”

उन्होंने यह भी बताया कि, मामले की जांच के लिए SIT गठित। Noida Authority के CEO का ट्रांसफर। Engineer और Junior Engineer सस्पेंड। 5 दिन में जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई।

राजनीतिक भाषा में यह बयान भरोसा दिलाने की कोशिश है, लेकिन सवाल जमीन पर अब भी खड़े हैं

हादसा कैसे हुआ: जब सुरक्षा शून्य थी

शनिवार तड़के युवराज अपने घर से कुछ ही दूरी पर थे। घना कोहरा, अंधेरा और कोई बैरिकेडिंग नहीं। कोई रिफ्लेक्टर नहीं। कोई चेतावनी बोर्ड नहीं। SUV गहरे गड्ढे में जा गिरी। हादसे के बाद युवराज करीब दो घंटे तक कार की छत पर खड़े होकर मदद के लिए चिल्लाते रहे। उनके पिता सामने खड़े थे, बचाव दल भी मौजूद था — लेकिन रेस्क्यू सिस्टम फेल रहा।

सुबह 4:30 बजे शव बरामद हुआ

दो घंटे तक सिस्टम कहां था?

नोएडा जैसे “Smart City” में आदमी मरता रहा, सिस्टम मीटिंग में रहा। युवराज मदद मांगता रहा, फाइलें साइन का इंतजार करती रहीं।

अगर यही हादसा किसी वीआईपी इलाके में होता, तो शायद बैरिकेड पहले लगते, बयान बाद में आते।

FIR और कानून: जमीन किसकी, जिम्मेदारी किसकी?

इस घटना के बाद पुलिस ने दो रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ FIR, BNS की धारा 105, 106, 125 गैर-इरादतन हत्या लापरवाही से मौत। अब civil rights activists मांग कर रहे हैं जमीन के ownership records सार्वजनिक हों। ड्रेनेज प्लान लटकाने वाले अफसरों पर एक्शन हो।

Bigger Question: Development किसके लिए?

ग्रेटर नोएडा जैसे तेज़ी से बढ़ते शहर में बिल्डर का प्रोजेक्ट चलता है, सुरक्षा पीछे छूट जाती है, और कीमत आम आदमी की जान चुकाती है।

युवराज की मौत यही सवाल छोड़ती है क्या विकास का मतलब सुरक्षा से समझौता है?

इंसाफ या फाइलों की कब्र?

SIT बनी है, अफसर हटे हैं, बयान आए हैं — लेकिन असली परीक्षा अब होगी।

क्या दोषियों को सजा मिलेगी? या युवराज का मामला भी “process में है” कहकर दबा दिया जाएगा? देश देख रहा है। परिवार इंतजार कर रहा है।

Noida Engineer Death: पुलिस की बड़ी कार्रवाई, बिल्डर सलाखों के पीछे

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